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Tuesday, March 27, 2012

जिंदगी सिर्फ तेरी मोहोब्त की मोहताज़ नही ....


जिंदगी सिर्फ तेरी मोहोब्त की मोहताज़ नही ....

बस तेरी यादे ही काफी है जिंदा रहने क लिए !

तू मुझे मझधार मे थी छोड़ आई , ज़माने के डर से...

सारी कसमे तोड़ आये थे ,बदनामी के डर से!

मैं फिर भी तेरी रहा देखता रहा ,

हर ज़माने से तेरी मोहोब्त के लिए लड़ता रहा!

सोचा मेरा दर्द देख के तेरा पत्थर दिल तोह पिग्लेगा ...

तू फिर भी न पिगली मेरी दीवानगी से !

अब मेरे पास और कोई दूजा रास्ता नहीं..

मेरी मौत ही तेरी प्यार की कहावत होगी!


तू रोएगी तोह नही यह मैं जानता हूँ

पर क्या करू तेरा आशिक हूँ, तुझे यह अहसास भी तोह दिलाना है !

अपने कफ़न से तेरी डोली को भी तो सजाना है..

तेरी विदायी के साथ यह संसार भी तोह त्यागना है!

तेरा दिल अभी भी जो न पिगाला हो तो ....


जाते जाते एक एहसान मुझपे करती जा...

कसम मुझे यह देती जा कि तू रहेगी सदा खुश

चाहे तेरी डोली के साथ मेरा जनाजा निकले.......

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